अपने दोस्तों के साथ चर्चा
तुम अपने आप के लिए डिस्कवर क्या भगवान की तरह है और कैसे तुम रहते हैं भगवान चाहता है चाहेंगे?
अधिकांश लोग अपने दोस्तों के साथ एक समूह में इन खोजों बनाने के लिए पसंद है। यहाँ आपकी चर्चा शुरू कर पाने के लिए कुछ सवाल हैं
आध्यात्मिक समुदाय की खोज #19
एक दूसरे के लिए देखभाल
1. इस हफ्ते में आप किस चीज़ के लिए धन्यवादित हो? ( इस हफ्ते में क्या अच्छा हुआ?)
2. आप कौनसी समस्या से झूंझ रहे हो और हम किस प्रकार मदत कर सकते हैं? (इस हफ्ते में क्या अच्छा नहीं हुआ?)
जवाबदेही
3. हमने जो वचन पिछले हफ्ते में सीखा उसको आपने अनुसरण में किस प्रकार लगाया ?
4. आपने वह वचन किसके साथ बांटा और आपको कैसे लगा?
5. क्या जरूरत है तुम पिछले हफ्ते में समुदाय को पूरा किया?
पता चलता है
6. आप किसी को एक वचन पढने के लिए कहें
7. एक सदस्य को अपने शब्दों में कहने के लिए कहें
8. बाकी सदस्यों को पूछे कि उसमे से क्या छूट गया है?
लूका 23:32-56
32दो और व्यक्ति, जो दोनों ही अपराधी थे, उसके साथ मृत्यु दण्ड के लिये बाहर ले जाये जा रहे थे।33फिर जब वे उस स्थान पर आये जो “खोपड़ी” कहलता है तो उन्होंने उन दोनों अपराधियों के साथ उसे क्रूस पर चढ़ा दिया, एक अपराधी को उसके दाहिनी ओर दूसरे को बाँई ओर।
34इस पर यीशु बोला, “हे परम पिता, इन्हें क्षमा करना क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं।” फिर उन्होंने पासा फेंक कर उसके कपड़ों का बटवारा कर लिया।
35वहाँ खड़े लोग देख रहे थे। यहूदी नेता उसका उपहास करते हुए बोले, “इसने दूसरों का उद्धार किया है। यदि यह परमेश्वर का चुना हुआ मसीह है तो इसे अपने आप अपनी रक्षा करने दो।”
36सैनिकों ने भी आकर उसका उपहास किया। उन्होंने उसे सिरका पीने को दिया
37और कहा, “यदि तू यहूदियों का राजा है तो अपने आपको बचा ले।”
38(उसके ऊपर यह सूचना अंकित कर दी गई थी,
39वहाँ लटकाये गये अपराधियों में से एक ने उसका अपमान करते हुए कहा, “क्या तू मसीह नहीं है? हमें और अपने आप को बचा ले।”
40किन्तु दूसरे ने उस पहले अपराधी को फटकारते हुए कहा, “क्या तू परमेश्वर से नहीं डरता? तुझे भी वही दण्ड मिल रहा है।
41किन्तु हमारा दण्ड तो न्याय पूर्ण है क्योंकि हमने जो कुछ किया, उसके लिये जो हमें मिलना चाहिये था, वही मिल रहा है पर इस व्यक्ति ने तो कुछ भी बुरा नहीं किया है।”
42फिर वह बोला, “यीशु जब तू अपने राज्य में आये तो मुझे याद रखना।”
43यीशु ने उससे कहा, “मैं तुझ से सत्य कहता हूँ, आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।”
44उस समय दिन के बारह बजे होंगे तभी तीन बजे तक समूची धरती पर गहरा अंधकार छा गया।
45सूरज भी नहीं चमक रहा था। उधर मन्दिर में परदे फट कर दो टुकड़े हो गये।
46यीशु ने ऊँचे स्वर में पुकारा, “हे परम पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों सौंपता हूँ।” यह कहकर उसने प्राण छोड़ दिये।
47जब रोमी सेनानायक ने, जो कुछ घटा था, उसे देखा तो परमेश्वर की प्रशंसा करते हुए उसने कहा, “यह निश्चय ही एक अच्छा मनुष्य था!”
48जब वहाँ देखने आये एकत्र लोगों ने, जो कुछ हुआ था, उसे देखा तो वे अपनी छाती पीटते लौट गये।
49किन्तु वे सभी जो उसे जानते थे, उन स्त्रियों समेत, जो गलील से उसके पीछे पीछे आ रहीं थीं, इन बातों को देखने कुछ दूरी पर खड़े थे।
50-
51अब वहीं यूसुफ नाम का एक पुरुष था जो यहूदी महासभा का एक सदस्य था। वह एक अच्छा धर्मी पुरुष था। वह उनके निर्णय और उसे काम में लाने के लिये सहमत नहीं था। वह यहूदियों के एक नगर अरमतियाह का निवासी था। वह परमेश्वर के राज्य की बाट जोहा करता था।
52वह व्यक्ति पिलातुस के पास गया और यीशु के शव की याचना की।
53उसने शव को क्रूस पर से नीचे उतारा और सन के उत्तम रेशमों के बने कपड़े में उसे लपेट दिया। फिर उसने उसे चट्टान में काटी गयी एक कब्र में रख दिया, जिसमें पहले कभी किसी को नहीं रखा गया था।
54वह शुक्रवार का दिन था और सब्त का प्रारम्भ होने को था।
55वे स्त्रियाँ जो गलील से यीशु के साथ आई थीं, यूसुफ के पीछे हो लीं। उन्होंने वह कब्र देखी, और देखा कि उसका शव कब्र में कैसे रखा गया।
56फिर उन्होंने घर लौट कर सुगंधित सामग्री और लेप तैयार किये। सब्त के दिन व्यवस्था के विधि के अनुसार उन्होंने आराम किया।
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आवेदन
9. जब पूरा वचन पूर्ण हो जाए, तो किसी को पूरी कहानी दोहराने के लिए कहें.
10. यह वचन हमें परमेश्वर के बारे में क्या बताता हैं?
11. यह वचन हमें लोगों के बारे क्या बताता है?
की योजना बना
12. अगर इस वचन में सच्चाई है, तो हमें कौनसा व्यवहार इस हफ्ते में बदलना चाहिए?
13. आप किसको इस हेफाते में यह कहानी सुनायेंगे?
14. हमारे समाज/मोहल्ले ले में कौनसी जरूरतें है जो हम पूरा कर सकते हैं?










