अपने दोस्तों के साथ चर्चा
तुम अपने आप के लिए डिस्कवर क्या भगवान की तरह है और कैसे तुम रहते हैं भगवान चाहता है चाहेंगे?
अधिकांश लोग अपने दोस्तों के साथ एक समूह में इन खोजों बनाने के लिए पसंद है। यहाँ आपकी चर्चा शुरू कर पाने के लिए कुछ सवाल हैं
आध्यात्मिक समुदाय की खोज #14
एक दूसरे के लिए देखभाल
1. इस हफ्ते में आप किस चीज़ के लिए धन्यवादित हो? ( इस हफ्ते में क्या अच्छा हुआ?)
2. आप कौनसी समस्या से झूंझ रहे हो और हम किस प्रकार मदत कर सकते हैं? (इस हफ्ते में क्या अच्छा नहीं हुआ?)
जवाबदेही
3. हमने जो वचन पिछले हफ्ते में सीखा उसको आपने अनुसरण में किस प्रकार लगाया ?
4. आपने वह वचन किसके साथ बांटा और आपको कैसे लगा?
5. क्या जरूरत है तुम पिछले हफ्ते में समुदाय को पूरा किया?
पता चलता है
6. आप किसी को एक वचन पढने के लिए कहें
7. एक सदस्य को अपने शब्दों में कहने के लिए कहें
8. बाकी सदस्यों को पूछे कि उसमे से क्या छूट गया है?
मरकुस 5:1-20
1फिर वे झील के उस पार गिरासेनियों के देश पहुँचे।2यीशु जब नाव से बाहर आया तो कब्रों में से निकल कर तत्काल एक ऐसा व्यक्ति जिस में दुष्टात्मा का प्रवेश था, उससे मिलने आया।
3वह कब्रों के बीच रहा करता था। उसे कोई नहीं बाँध सकता था, यहाँ तक कि जंजीरों से भी नहीं।
4क्योंकि उसे जब जब हथकड़ी और बेड़ियाँ डाली जातीं, वह उन्हें तोड़ देता। ज़ंजीरों के टुकड़े-टुकड़े कर देता और बेड़ियों को चकनाचूर। कोई भी उसे काबू नहीं कर पाता था।
5कब्रों और पहाड़ियों में रात-दिन लगातार, वह चीखता-पुकारता अपने को पत्थरों से घायल करता रहता था।
6उसने जब दूर से यीशु को देखा, वह उसके पास दौड़ा आया और उसके सामने प्रणाम करता हुआ गिर पड़ा।
7और ऊँचे स्वर में पुकारते हुए बोला, “सबसे महान परमेश्वर के पुत्र, हे यीशु! तू मुझसे क्या चाहता है? तुझे परमेश्वर की शपथ, मेरी विनती है तू मुझे यातना मत दे।”
8क्योंकि यीशु उससे कह रहा था, “ओ दुष्टात्मा, इस मनुष्य में से निकल आ।”
9तब यीशु ने उससे पूछा, “तेरा नाम क्या है?” और उसने उसे बताया, “मेरा नाम लीजन अर्थात् सेना है क्योंकि हम बहुत से हैं।”
10उसने यीशु से बार बार विनती की कि वह उन्हें उस क्षेत्र से न निकाले।
11वहीं पहाड़ी पर उस समय सुअरों का एक बड़ा सा रेवड़ चर रहा था।
12दुष्टात्माओं ने उससे विनती की, “हमें उन सुअरों में भेज दो ताकि हम उन में समा जायें।”
13और उसने उन्हें अनुमति दे दी। फिर दुष्टात्माएँ उस व्यक्ति में से निकल कर सुअरों में समा गयीं, और वह रेवड़, जिसमें कोई दो हजार सुअर थे, ढलवाँ किनारे से नीचे की तरफ लुढ़कते-पुढ़कते दौड़ता हुआ झील में जा गिरा। और फिर वहीं डूब मरा।
14फिर रेवड़ के रखवालों ने जो भाग खड़े हुए थे, शहर और गाँव में जा कर यह समाचार सुनाया। तब जो कुछ हुआ था, उसे देखने लोग वहाँ आये।
15वे यीशु के पास पहुँचे और देखा कि वह व्यक्ति जिस पर दुष्टात्माएँ सवार थीं, कपड़े पहने पूरी तरह सचेत वहाँ बैठा है, और यह वही था जिस में दुष्टात्माओं की पूरी सेना समाई थी, वे डर गये।
16जिन्होंने वह घटना देखी थी, लोगों को उसका ब्योरा देते हुए बताया कि जिसमें दुष्टात्माएँ समाई थीं, उसके साथ और सुअरों के साथ क्या बीती।
17तब लोग उससे विनती करने लगे कि वह उनके यहाँ से चला जाये।
18और फिर जब यीशु नाव पर चढ़ रहा था तभी जिस व्यक्ति में दुष्टात्माएँ थीं, यीशु से विनती करने लगा कि वह उसे भी अपने साथ ले ले।
19किन्तु यीशु ने उसे अपने साथ चलने की अनुमति नहीं दी। और उससे कहा, “अपने ही लोगों के बीच घर चला जा और उन्हें वह सब बता जो प्रभु ने तेरे लिये किया है। और उन्हें यह भी बता कि प्रभु ने दया कैसे की।”
20फिर वह चला गया और दिकपुलिस के लोगों को बताने लगा कि यीशु ने उसके लिये कितना बड़ा काम किया है। इससे सभी लोग चकित हुए।
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आवेदन
9. जब पूरा वचन पूर्ण हो जाए, तो किसी को पूरी कहानी दोहराने के लिए कहें.
10. यह वचन हमें परमेश्वर के बारे में क्या बताता हैं?
11. यह वचन हमें लोगों के बारे क्या बताता है?
की योजना बना
12. अगर इस वचन में सच्चाई है, तो हमें कौनसा व्यवहार इस हफ्ते में बदलना चाहिए?
13. आप किसको इस हेफाते में यह कहानी सुनायेंगे?
14. हमारे समाज/मोहल्ले ले में कौनसी जरूरतें है जो हम पूरा कर सकते हैं?










