अपने दोस्तों के साथ चर्चा

तुम अपने आप के लिए डिस्कवर क्या भगवान की तरह है और कैसे तुम रहते हैं भगवान चाहता है चाहेंगे?

अधिकांश लोग अपने दोस्तों के साथ एक समूह में इन खोजों बनाने के लिए पसंद है। यहाँ आपकी चर्चा शुरू कर पाने के लिए कुछ सवाल हैं


    

आध्यात्मिक समुदाय की खोज #12

एक दूसरे के लिए देखभाल

1. इस  हफ्ते में आप किस चीज़ के लिए धन्यवादित हो? ( इस हफ्ते में क्या अच्छा हुआ?)

2. आप कौनसी समस्या से झूंझ रहे हो और हम किस प्रकार मदत कर सकते हैं? (इस हफ्ते में क्या अच्छा नहीं  हुआ?)

जवाबदेही

3. हमने जो वचन पिछले हफ्ते में सीखा उसको आपने अनुसरण में किस प्रकार लगाया ?

4. आपने वह वचन किसके साथ बांटा और आपको कैसे लगा?

5. क्या जरूरत है तुम पिछले हफ्ते में समुदाय को पूरा किया?

पता चलता है

6. आप किसी को एक वचन पढने के लिए कहें

7. एक सदस्य को अपने शब्दों में कहने के लिए कहें

8. बाकी सदस्यों को पूछे कि उसमे से क्या छूट गया है?

लूका 5:17-26

17ऐसा हुआ कि एक दिन जब वह उपदेश दे रहा था तो वहाँ फ़रीसी और यहूदी धर्मशास्त्री भी बैठे थे। वे गलील और यहूदिया के हर नगर तथा यरूशलेम से आये थे। लोगों को ठीक करने के लिए प्रभु की शक्ति उसके साथ थी। 18तभी कुछ लोग खाट पर लकवे के एक रोगी को लिये उसके पास आये। वे उसे भीतर लाकर यीशु के सामने रखने का प्रयत्न कर रहे थे। 19किन्तु भीड़ के कारण उसे भीतर लाने का रास्ता न पाते हुए वे ऊपर छत पर जा चढ़े और उन्होंने उसे उसके बिस्तर समेत छत के बीचोबीच से खपरेल हटाकर यीशु के सामने उतार दिया। 20उनके विश्वास को देखते हुए यीशु ने कहा, “हे मित्र, तेरे पाप क्षमा हुए।” s 21तब यहूदी धर्मशास्त्री और फ़रीसी आपस में सोचने लगे, “यह कौन है जो परमेश्वर के लिए ऐसे अपमान के शब्द बोलता है? परमेश्वर को छोड़ कर दूसरा कौन है जो पाप क्षमा कर सकता है?” s 22किन्तु यीशु उनके सोच-विचार को समझ गया। सो उत्तर में उसने उनसे कहा, “तुम अपने मन में ऐसा क्यों सोच रहे हो? 23सरल क्या है? यह कहना कि ‘तेरे पाप क्षमा हुए’ या यह कहना कि ‘उठ और चल दे?’ 24पर इसलिये कि तुम जान सको कि मनुष्य के पुत्र को धरती पर पाप क्षमा करने का अधिकार है।” उसने लकवे के मारे से कहा, “मैं तुझसे कहता हूँ, खड़ा हो, अपना बिस्तर उठा और घर चला जा!” s 25सो वह तुरन्त खड़ा हुआ और उनके देखते देखते जिस बिस्तर पर वह लेटा था, उसे उठा कर परमेश्वर की स्तुति करते हुए अपने घर चला गया। 26वे सभी जो वहाँ थे आश्चर्यचकित होकर परमेश्वर का गुणगान करने लगे। वे श्रद्धा और विस्मय से भर उठे और बोले, “आज हमने कुछ अद्भुत देखा है!” s
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आवेदन

9. जब पूरा वचन पूर्ण हो जाए, तो किसी को पूरी कहानी दोहराने के लिए कहें.

10. यह वचन हमें परमेश्वर के बारे में क्या बताता हैं?

11. यह वचन  हमें लोगों के बारे क्या बताता है?

की योजना बना

12. अगर इस वचन में सच्चाई है, तो हमें कौनसा व्यवहार इस हफ्ते में बदलना चाहिए?

13. आप किसको इस हेफाते में यह कहानी सुनायेंगे?

14. हमारे समाज/मोहल्ले ले में कौनसी जरूरतें है जो हम पूरा कर सकते हैं?